शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले व्रत के नियम,क्रम और विधि जाने:

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले व्रत के नियम,क्रम और विधि जाने:

इस संसार मे वही प्राणी मान-सम्मान पाता है जिस पर स्वयं माँ लक्ष्मी की कृपा होती है। दरिद्र व्यक्ति तो सदैव तिरस्कार ही पाता है।इसीलिए हर व्यक्ति को माँ वैभव लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए 'वैभवलक्ष्मी व्रत ' करना चाहिए। 

वैभवलक्ष्मी व्रत करने की नियम-विधि इस प्रकार है-

1 यह व्रत पूरी श्रध्दा- भक्ति और पवित्र भावना से करना चाहिए। अश्रध्दा से, बिना भाव के यह व्रत नही रखना चाहिए क्योंकि ऐसे विचारों के कारण व्रत का कोई फल नही मिलता है।
2 माँ वैभवलक्ष्मी का व्रत शुक्रवार के दिन रखा जाता है।व्रत शुरू करते समय यानि पहले शुक्रवार को 11 या 21 शुक्रवार की मन्नत माँगनी पड़ती है।इतने शुक्रवारों तक नियमित रूप से व्रत रखने का संकल्प करना पड़ता है।
3 व्रत के दिन सुबह ही स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। तथा मन ही मन मे 'जय माँ लक्ष्मी,जय माँ लक्ष्मी' का निरन्तर जाप करते रहना चाहिए और पूरे भाव से माँ वैभवलक्ष्मी का स्मरण करना चाहिए। 
4 शुक्रवार के दिन सुबह के समय पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठना चाहिए। सामने एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल रंग का सूती कपड़ा बिताना चाहिए। कपड़े पर थोड़े-से चावल की ढेरी बनाकर उस पर पानी से भरा एक कलश रखे और कलश के ऊपर एक कटोरी रखें।
5 कटोरी मे सोने,चांदी की कोई वस्तु या सिक्के रखने चाहिए। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर रखें,प्रसाद के लिए कोई मीठी चीज बनाकर पहले से ही रखे अगर संभव न हो गुड़ या शक्कर का प्रयोग कर सकते हैं।
6 माँ लक्ष्मी को "श्री यंत्र" अत्यंत प्रिय है।व्रत करते समय और कथा कहने से पहले श्री यंत्र का सच्चे दिल से दर्शन करने चाहिए। दर्शन के बाद 'लक्ष्मी स्तवन' का पाठ करे और व्रत कथा कहें।फिर कटोरी मे रखे गहने या रूपये पर हल्दी-कुमकुम और चावल चढ़ाकर उसकी पूजा करें और लाल रंग का कोई फूल चढ़ाये। इसके बाद "माँ लक्ष्मी जी की आरती" गाते हुए आरती उतारें।
7 उसके बाद कटोरी मे रखा हुआ गहना या रूपया उठा लें।फिर कलश का जल तुलसी के पौधे मे लगा दे और चावल पक्षियों को चुंगी दे।









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