माँ लक्ष्मी किस-किस स्थान पर निवास करती हैं श्लोक या मंत्र: माँ लक्ष्मी जी की महिमा।
श्लोक
यत्राभ्यागदानमान चरण प्रक्षालन भोजनम्।
जहाँ अतिथियों का सत्कार किया जाता है व उनको भोजन कराया जाता है।
सत्सेवा पितृदेववार्चन विधि: सत्यंगवां पालनम्।।
जहाँ सत्य का पालन किया जाता है,जहाँ बुरे कर्म नहीं किये जाते हैं, जहाँ नियमित रूप से ईश्वर की पूजा और अन्य धर्म-कार्य किये जाते हैं। जहाँ गायों की रक्षा की जाती है।
धान्यागार नामपि सग्रहो न कलहश्चित्ता तुरूपापिया।
जहाँ दान देने के उद्देश्य से धन-धान्य का संग्रह किया जाता है, जहाँ क्लेश नहीं होता है,जहाँ स्त्री विजयी और संतोषी होती है।
दृष्टा ब्रह्म हरि स्वामित्व कमला तस्मिन् गृहे निष्फला।।
ऐसे स्थान पर मैं सदैव स्थित रहती हूँ। जहाँ यह कार्य नहीं होते हैं वहाँ शायद ही कभी दृष्टि डालती हूँ।(तात्पर्य यह है कि जहाँ शुभ-कार्य किये जाते हैं, माँ लक्ष्मी जी केवल वहीं निवास करती हैं।)

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