हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों लगाते हैं? संबंधित कथा-
भगवान श्री राम, रावण को मारकर सीता को छुड़ा लाए थे और अयोध्या में आकर आनंदपूर्वक राज्य करते थे। सब बंदर, भालुओं को तो श्री रामचंद्र जी ने समझा- बुझाकर विदा कर दिया था, किंतु हनुमान जी की भक्ति देखकर उन्हें जाने के लिए न कह सके। हनुमान जी बड़े प्रेम से नित्यप्रति रामचंद्र जी और सीता जी की सेवा करते थे।
एक दिन की बात है कि हनुमान जी को बहुत जोर से भूख लग रही थी। सीता जी स्नान कर रही थीं। वे बड़ी आतुरता से उनके आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
जैसे ही सीता जी स्नान करके आई, हनुमान जी मचल उठे और बोले
- "माता जी मुझे बहुत जोर से भूख लग रही है ।जल्दी कुछ खाने को दो।"
सीता जी मांग मे सिंदूर भरते हुए बोलीं -"जरा ठहरो हनुमान! अभी देती हूँ।हनुमान जी ने सीता जी को मांग मे सिंदूर भरते देखकर पूछा - "हे माता! ये क्या लगा रही हो?"
सीता जी मुस्कराते हुए बोली-"यह सिंदूर है। तुम्हारे प्रभु के कल्याण के लिए ही इसे मैं लगा रही हूँ। "
यह सुनते ही हनुमान जी की भूख जाने कहाँ गायब हो गई। वे भागे-भागे गए और थोड़ी ही देर मे वापस आ गए।
तब सीता जी उन्हे देखकर खिल-खिलाकर हँस पड़ी क्योंकि हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाए हुए थे।
सीता जी ने हँसी रोकते हुए कहा - " यह क्या कर आए हनुमान?"हनुमान ने सहज भाव से उत्तर दिया- "माता! इतने सारे सिंदूर को लगाने से हमारे प्रभु का ढेर सारा कल्याण होगा।"
यह सुनकर सीता जी की आँखें ममता - दुलार से भीग गई।तभी से प्रभु के कल्याण के लिए हनुमान जी को सिंदूर लगाया जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें