विष्णु भगवान की आरती और भजन लिरिक्स हिंदी में -
हिंदू धर्म के पुराणों में भगवान विष्णु के अलौकिक रूपों और महिमा का वर्णन मिलता है। इन्हें अनेक अन्य नामों से भी जाना जाता जिनमें से प्रमुख- हरि, नारायण,जनार्दन तथा अच्युत हैं। विशेष प्रकार से श्री हरि की आराधना गुरूवार दिवस और एकादशी को की जाती है।हमने यहाँ श्री हरि की आरती तथा भजन को लिखित रूप में प्रस्तुत किया है।
।।ओउम् जय जगदीश हरे।।आरती
ओउम् जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे।।ओउम्।।
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे कष्ट मिटे तन का।।ओउम्।।
मातु-पिता तुम मेरे शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा आस करूँ जिसकी।।ओउम्।।
तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर तुम सबके स्वामी।।ओउम्।।
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी,कृपा करो भर्ता।।ओउम्।।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किसी विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति।।ओउम्।।
दीन बन्धु दुखहर्ता तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ उठाओ, शरण पड़ा तेरे।।ओउम्।।
विषय विकार मिटाओ,पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा।।ओउम्।।
श्री जगदीश जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख सम्पत्ति पावे।।ओउम्।
।।श्री मन नारायण नारायण ।।भजन
श्री मन नारायण नारायण,भज ले नारायण नारायण।
लाख चौरासी भोग के तुने यह मानव तन पाया।
रहा भटकता माया में तूने कभी न हरि गुण गाया।
भज ले नारायण नारायण, श्री मन नारायण नारायण।
वेद पुराण, भागवत,गीता आत्मज्ञान सिखाएं।
रामायण जो पड़े हमेशा राम ही राम दिखाएं।
भज ले नारायण नारायण, श्री मन नारायण नारायण।
गज और ग्रह लड़े जल भीतर लड़त लड़त गज हारा।
प्राणों पर जब आन पड़ी तो प्रेम से तुम्हें पुकारा।
भज ले नारायण नारायण, श्री मन नारायण नारायण।
कोई नहीं है जग मे तेरा,तू काहे भरमाये।
प्रभु की शरण मे आजा बंदे वो पार लगाये।
भज ले नारायण नारायण, श्री मन नारायण नारायण।
श्री मन नारायण नारायण,भज ले नारायण नारायण।

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